40 दिनों बाद भी लॉकडाउन तो नहीं खुला लेकिन पूरे देश को रेड, ऑरेंज और ग्रीन ज़ोन में बाँट दिया गया, लेकिन अफसोस इस पर भी हाय तौबा मच गई।
दरअसल हुआ यूँ कि ग्रीन यानी हरे रंग को सबसे सुरक्षित मानते हुए सुरक्षित इलाकों को ग्रीन ज़ोन में रखा गया है। इस पर कुछ भक्त भड़क उठे। उनका कहना है कि सुरक्षित इलाकों को ग्रीन नहीं बल्कि ऑरेंज यानी भगवा रंग के ऑरेंज ज़ोन में रखा जाना चाहिए क्योंकि उन्हें हरे रंग से सख्त नफरत है। भक्तों ने आवाज़ उठाई है कि ग्रीन ज़ोन में उन इलाकों को रखा जाए जहाँ सबसे ज़्यादा केस हैं।
हमने इस मामले में एक भक्त से बात की, उसने हिलते डुलते ये कहा "हमारी स्कूल की किताबों में सब गलत पढ़ाया गया है, 70 सालों से हमे बताया जा रहा है कि हरा रंग सुरक्षित होने का प्रतीक है और भगवा रंग खतरे का, लेकिन अब वक्त आ गया है कि हम इतिहास का सच सामने ले आएं। हमें अपनी युवा पीढ़ी को बताना होगा कि हरा रंग सुरक्षा नहीं बल्कि खतरे का प्रतीक है और भगवा रंग खतरे का नहीं बल्कि सुरक्षा का प्रतीक है।"
एक आए भक्त ने अपने विचार इस प्रकार रखे "अगर हमारी माँगों को नहीं माना गया तो हम हरे का नाम भगवा और भगवा का नाम हरा कर देंगे। हमारे पास आइडिया की कोई कमी नहीं है लेकिन हम सुरक्षित इलाकों में हरा रंग बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे।"
हरे रंग पर लंबे चौड़े बयान के बाद यही दोनों सब्ज़ी मंडी में भिंडी, पालक, लौकी और हरी धनिया खरीदते पकड़े गए। और तो और फल की दुकान पर भी अंगूर, कच्चा आम और ग्रीन एप्पल खरीदते दिखे।
दरअसल हुआ यूँ कि ग्रीन यानी हरे रंग को सबसे सुरक्षित मानते हुए सुरक्षित इलाकों को ग्रीन ज़ोन में रखा गया है। इस पर कुछ भक्त भड़क उठे। उनका कहना है कि सुरक्षित इलाकों को ग्रीन नहीं बल्कि ऑरेंज यानी भगवा रंग के ऑरेंज ज़ोन में रखा जाना चाहिए क्योंकि उन्हें हरे रंग से सख्त नफरत है। भक्तों ने आवाज़ उठाई है कि ग्रीन ज़ोन में उन इलाकों को रखा जाए जहाँ सबसे ज़्यादा केस हैं।
हमने इस मामले में एक भक्त से बात की, उसने हिलते डुलते ये कहा "हमारी स्कूल की किताबों में सब गलत पढ़ाया गया है, 70 सालों से हमे बताया जा रहा है कि हरा रंग सुरक्षित होने का प्रतीक है और भगवा रंग खतरे का, लेकिन अब वक्त आ गया है कि हम इतिहास का सच सामने ले आएं। हमें अपनी युवा पीढ़ी को बताना होगा कि हरा रंग सुरक्षा नहीं बल्कि खतरे का प्रतीक है और भगवा रंग खतरे का नहीं बल्कि सुरक्षा का प्रतीक है।"
एक आए भक्त ने अपने विचार इस प्रकार रखे "अगर हमारी माँगों को नहीं माना गया तो हम हरे का नाम भगवा और भगवा का नाम हरा कर देंगे। हमारे पास आइडिया की कोई कमी नहीं है लेकिन हम सुरक्षित इलाकों में हरा रंग बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे।"
हरे रंग पर लंबे चौड़े बयान के बाद यही दोनों सब्ज़ी मंडी में भिंडी, पालक, लौकी और हरी धनिया खरीदते पकड़े गए। और तो और फल की दुकान पर भी अंगूर, कच्चा आम और ग्रीन एप्पल खरीदते दिखे।
नोट : इस पोस्ट को सीरियसली ना लें, इसे बस मनोरंजन के लिए लिखा गया है, इसका सच्चाई से कोई वास्ता नहीं
